“भक्ति के पवित्र भाव ही हमें भगवान को अपने करीब ला सकते: जाकीर की रिपोर्ट”
“दृढ़ निश्चय और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संगम व्यक्ति को निडर बनाता और उसे चुनौतियों को अवसरों में बदलने की शक्ति देता है।”
“ना कोई प्रसाद और ना कोई चढ़ावा, पांच साल के ध्रुव ने सिर्फ भावों से ही भगवान को प्रसन्न कर लिया था।”
“अटूट भक्ति के कारण ध्रुव का राज्य में बहुत सम्मान होने लगा और पिता ने पुत्र ध्रुव को अपना सिंहासन भेंट कर दिया था।”
“कठिन से कठिन प्रसंग हमें सिखाता है, कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर पर विश्वास नहीं छोड़ना चाहिए और दृढ़ इच्छा शक्ति से ही ईश्वर को पाया जा सकता है।”
“भीमपुर:” दृढ़ संकल्प और ईश्वर में अटूट विश्वास सफलता और मानसिक शांति के आधार स्तंभ माने जाते हैं। उक्त संगम विपरीत परिस्थितियों में भी साहस देते है, यह अहंकार कम और भक्ति के साथ कर्म करने की प्रेरणा देते है, जिससे जीवन के लक्ष्य पूर्ण रूप से प्राप्त होते हैं। विश्वास के साथ किया गया प्रयास अडिग चरित्र और सफलता सुनिश्चित करता है। जिसे धरातल पर उतारने की पुरजोर कोशिश पण्डित श्री नीरज महाराज द्वारा आयोजक श्री मोतीलाल ठाकरे जीरूढाना रोड कासमारखंडी ने की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखण्ड भीमपुर के कासमारखण्डी में
श्रीमद् भागवत कथा का तृतीय दिवस कथा में भक्त ध्रुव की कथा एवं राजास्थल ठाकरे परिवार के निज निवास कासमारखण्डी में संपन्न होने जा रहा कथावाचक पण्डित श्री नीरज महाराज रहट गाँव वाले के मुखार बिन्द से भक्त ध्रुव की कथा एवं मानव जीवन के विषय में पण्डित ने श्रोतागणो के हृदय को भाव विभोर कर दिया। आयोजक श्री मोतीलाल ठाकरे एवं समस्त ठाकरे परिवार जीरूढाना रोड कासमारखंडी में
श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त ध्रुव की कथा भक्ति, दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति अटूट विश्वास की कहानी प्रस्तुत कर भक्त ध्रुव के जीवनी पर रोशनी डालते हुए महाराज ने बताया कि सौतेली माँ सुरुचि के दुर्व्यवहार से अपमानित होकर, 5 वर्षीय ध्रुव ने माता सुनीति की सलाह पर वन में कठिन तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न किया और ध्रुव तारे के रूप में अमर पद प्राप्त किया। राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को सौतेली माँ ने गोद में बैठने से रोक दिया। वही अपमानित होकर ध्रुव ने भगवान को पाने की प्रतिज्ञा कर
नारद जी की दीक्षा ली। जब नारद मुनि ने बालक ध्रुव की परीक्षा लेकर उन्हें ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र की दीक्षा दी और भक्ति का मार्ग दिखाया और सिखाया, जिसे ध्रुव ने मधुवन में वन जाकर भीषण तपस्या की, जिससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए, और भगवान विष्णु ने ध्रुव को दर्शन देकर वरदान दिया कि वे आकाश में ध्रुव तारे के रूप में अटल रहेंगे और उनके परिवार का नाम अमर हो जाएगा। कथा का सार यही सिखाता है कि सच्ची भक्ति और निश्चल मन से किसी भी प्रकार की सिद्धि पाई जा सकती है। जो कि ठाकरे परिवार द्वारा श्रीमद भागवत कथा का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ निज निवास कासमारखंडी में कर आनंदित हो रहे, साथ ही कथा का लाभ एवं प्रसाद समस्त क्षेत्र वासी प्रेम के साथ उठा रहे हैं।

संपादक केशर पालवी दैनिक बैतूल न्यूज चैनल सम्पर्क नम्बर 9424615699


