*धर्म के चार पग हैं दया, करुणा, कृपा, दान*
*पंडित श्री कृष्णाकुमार चौबे*
घोड़ा डोंगरी नगर के बस स्टैंड के पटेल कॉलोनी बजरंग मंदिर मेंआयोजित श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन कथा में श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए पंडित श्री कृष्ण कुमार चौबे ने कहा कि धर्म के चार पैर होते हैं दया करना ,करुणा दिखाना किसी पर कृपा करना, दान करना यह सब धर्म के ही काम है भंडारा करने से भंडारा पाने वाला भले तृप्त ना हो लेकिन भंडारा ग्रहण करने वाले के हृदय में मै बैठा हुआ वह प्रसादी मुझे प्राप्त हुई मैं तृप्त हुआ और आपका भंडारा सफल हो गया।
श्री चौबे जी कहते है कि पुत्र भाग्य से प्राप्त होते हैं और पुत्री सौभाग्य से प्राप्त होती है पुत्र एक कुल को तारता है लेकिन पुत्री तीन कुल को तारती है देवों के देव महादेव की सृष्टि के पालन हार हैं और परमपिता है भोलेनाथ की उपासना करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं कितना ही बड़ा संकट क्यों ना हो लेकिन भोलेनाथ की कृपा से सब संकट टल जाते हैं
इस कलयुग में जल का इतना प्रभाव है कि मात्र एक लोटा जल मात्र चढ़ाने से अच्छे स्वास्थ्य ,धन्य, लाभ, सौभाग्य, की प्राप्ति होती है और वह भक्त भोले का हमेशा के लिए हो जाता है।
आगे गुरु जी ने कहा कि बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए एक समय माता गोरा बिना बाबा भोलेनाथ की मर्जी से अपने पिता राजा दक्ष के यहां हवन पूजन कार्यक्रम में सम्मिलित होने गई थी जहां यज्ञ सभा में बाबा भोलेनाथ का आसान न देखकर पति अपमान देख माता गौरा मां क्रोधीत हो कर अग्नि प्रचलित कर अग्नि में देह त्याग कर दी जिससे बाबा भोलेनाथ क्रोधित हो गए और उन्हें अपना एक गण भेज कर यज्ञ को विध्वंस कर राजा दक्ष का सर धड़ से अलग कर दिया।
कथा के अंतिम दौर में बाबा भोलेनाथ माता गोरा का विवाह संपन्न हुआ जहां बाबा भोलेनाथ की मनमोहक झांकी एवं माता गोरा की अति सुंदर झांकी प्रस्तुत कर विवाह कार्य संपन्न हुआ जिसमें श्रोताओं ने बाबा भोलेनाथ माता गोरा की पाखरी कर भजन गाकर भक्ति विभोर हो श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

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