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उर्दू लिपि और कैलिग्राफी की विरासत को बचाने के लिए नई पीढ़ी को जोड़ना अनिवार्य : महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी अध्यक्ष सय्यद हसीन अख्तर*

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*उर्दू लिपि और कैलिग्राफी की विरासत को बचाने के लिए नई पीढ़ी को जोड़ना अनिवार्य : महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी अध्यक्ष सय्यद हसीन अख्तर*

खुल्दाबाद के चिश्तिया कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, खुल्दाबाद में दो सप्ताह का उर्दू कैलीग्राफी ख़त्ताती (सुलेख प्रमाणपत्र) कोर्स संपन्न

औरंगाबाद (इक़बाल अंसारी): उर्दू एजुकेशन सोसाइटी, औरंगाबाद के तत्वावधान में संचालित चिश्तिया कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, खुल्दाबाद के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित दो सप्ताह का उर्दू सुलेख (ख़त्ताती/कैलीग्राफ़ी) प्रमाणपत्र कोर्स (2 फरवरी से 16 फरवरी 2026) सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस कोर्स का आयोजन सोसाइटी के अध्यक्ष शेख मोहम्मद अय्यूब के मार्गदर्शन तथा महासचिव अब्दुल वहीद के संरक्षण में किया गया। कार्यक्रम को महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी, मुंबई का विशेष सहयोग भी प्राप्त हुआ।

समापन समारोह की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सैयद आसिफ ज़करिया ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. कीर्ति मालनी जावले उपस्थित रहीं। वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर महाराष्ट्र राज्य उर्दू साहित्य अकादमी मुंबई के कार्यवाहक अध्यक्ष सय्यद हसीन अख्तर ने विशेष रूप से शिरकत की।

ज्ञातव्य है कि इस सुलेख(ख़त्ताती/कैलीग्राफी) कोर्स का उद्घाटन 02 फरवरी 2026 को कोहिनूर कॉलेज, खुल्दाबाद के उर्दू विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अब्दुल मुजाहिद अंसारी के शुभ हाथों से संपन्न हुआ था। उर्दू विभागाध्यक्ष एवं कोर्स समन्वयक डॉ. सिद्दीकी अफ़रोज़ा ने पंद्रह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा अतिथियों का परिचय कराया। विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कोर्स को अत्यंत उपयोगी और मार्गदर्शक बताया।

मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. कीर्ति मालनी जावले ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू सुलेख (ख़त्ताती/कैलीग्राफी) हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रकार के कोर्स नई पीढ़ी को उर्दू भाषा और उसकी सौंदर्य चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अपने संबोधन में महाराष्ट्र उर्दू साहित्य अकादमी मुंबई के कार्यवाहक अध्यक्ष सय्यद हसीन अख्तर ने कहा कि उर्दू लिपि और सुलेख(ख़त्ताती/कैलीग्राफी) का स्थायी संरक्षण तभी संभव है जब नई पीढ़ी को इससे परिचित कराया जाए। यदि हम उर्दू सुलेख(ख़त्ताती/कैलीग्राफी) को जीवित रखना चाहते हैं, तो स्कूलों और कॉलेजों में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि अकादमी इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हरसंभव सहयोग और आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रयास करेगी।

इस अवसर पर उर्दू सुलेख(ख़त्ताती/कैलीग्राफी) के प्रशिक्षक जनाब नसीमुद्दीन की पंद्रह दिवसीय उल्लेखनीय सेवाओं के सम्मान में उन्हें मोमेंटो, प्रशस्ति-पत्र, शॉल और पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया गया। उल्लेखनीय है कि इस दो सप्ताह के कोर्स में कुल 45 विद्यार्थियों ने प्रवेश लेकर सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा किया। इनमें प्राथमिक, हाई स्कूल, जूनियर और सीनियर कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ गैर-उर्दू भाषी तथा गैर-मुस्लिम शिक्षकों की सहभागिता भी रही।

कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभाग की शिक्षिका डॉ. नाज़नीन सुल्ताना ने किया, जबकि सैफ जैदी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह गरिमामय समारोह संपन्न हुआ। इस कोर्स की सफलता में विभागाध्यक्ष डॉ. सिद्दीकी अफरोज़ा और डॉ. नाज़नीन सुल्ताना के विशेष प्रयास सराहनीय रहे।

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